उड़जा काले कावाँ, तेरे मुँह विच खण्ड पावाँ

उड़जा काले कावाँ, तेरे मुँह विच खण्ड पावाँ
लेजा तू संदेशा मेरा, मै सदके जावाँ
बाग़ों में फिर झूले पड़ गये
पक गई मिठियाँ अम्बियाँ
ये छोटी सी ज़िन्दगी के, राता लम्बियाँ लम्बियाँ
ओ घर आजा परदेसी के तेरी मेरी इक जिन्दडी -२
छम छम करता आया मौसम
प्यार के गीतों का, हो..
छम छम करता आया मौसम
प्यार के गीतों का
रस्ते पे अँखियाँ रस्ता देखे
बिछड़े मींतों का
आज मिलन की रात ना छेड़ो बात जुदाई बाली
मैं चुप तू चुप, प्यार सुने,बस प्यार ही बोले ख़ाली
ओ घर आजा परदेसी, के तेरी मेरी इक जिन्दडी
होये, ओ घर आजा परदेसी, के तेरी मेरी इक जिन्दडी
ओ मितरा, ओ यारा, यारी तोड़के मत जाना, हो
ओ मितरा, ओ यारा, यारी तोड़के मत जाना
मैंने जग छोडा, तू मुझको छोड़के मत जाना
ऐसा हो नहीं सकता, हो जाये तो मत घबराना
मैं दौड़ी आऊँगी, तू बस एक आबाज लगाना
ओ घर आजा परदेसी, के तेरी मेरी इक जिन्दडी
ओ घर आजा परदेसी, के तेरी मेरी इक जिन्दडी
उड़जा काले कावा तेरे मुँह विच खण्ड पावाँ
लेजा तू संदेशा मेरा मै सदके जावाँ
बाग़ों में फिर झूले पड़ गये
पक गई मिठियाँ अम्बियाँ
ये छोटी सी ज़िन्दगी दे राता लम्बियाँ लम्बियाँ
ओ घर आजा परदेसी के तेरी मेरी इक जिन्दरी
ओ घर आजा परदेसी, के तेरी मेरी इक जिन्दरी
ओ घर आजा परदेसी, के तेरी मेरी इक जिन्दरी

Comments